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Shayari

Raat ke andhere main dhundhta roshni
Din ke ujaale main dhundhu sukoon
Pyaar ki talaash main bit gaye barson
Jimmedariyon ne dafnaya jawani ka junoon

पंछी तू, डाली मैं

तू पंछी कहीं ओर का
आ बैठा इस डाल पे,
तुझे कल तो उड़ जाना है
क्या मिला घर बसा के;

मैं पेड़ किसी और का
मोह लिया तूने मुझे,
सब डाली पर है घर बसे
एक खाली रह गयी तेरे लिए।

सफर तेरा मेरा

जिन रास्तों से हमतुम गुज़रे थे पहले
वहाँ के पेड़-पत्थर लगे हैं पहचानने,
अब अकेला नहीं लगता है तेरे बिन
रास्ते भर हम करते हैं तेरी ही बातें।